शुक्रवार, 8 अगस्त 2008

अमेरिकी सियासत का नया रंग

अनवारूल हक
इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि अमेरिका में जैसा लोकतंत्र है, दुनिया भर में एक अलग पहचान है। वहां चुनाव भी बेहद लोकतांत्रिक ढंग से होता है, जहां शुचिता और पारदर्शिता की पूरी संभावना रहती है। चुनाव के वक्त वहां आरोप-प्रत्यारोप तो लगते हैं, लेकिन किसी भी नवीन और अविकसित लोकतंत्र से बिल्कुल होते हैं। इसका मतलब यह कि राजनेताओं की भाषा का एक स्तर होता है और उनके मुद्दे भी देश के हित और अख्ंाडता से ही जुड़े होते हैं। हर एक का सलीका पूरी तरह लोकतांत्रिक होता है।परंतु पिछले दिनों राष्ट्रपति चुनाव की हलचल के बीच हिलेरी की ओबामा को घेरने की कोशिश अमेरिका की सियासत के बदलते रंग की एक झलक पेश कर गई। डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने की होड़ में हिलेरी अपने प्रतिद्वंद्वी बराक ओबामा को 40 साल पहले के अमेरिकी चुनाव तक लेकर चली गईं और राबर्ट कैनेडी की हत्या का हवाला तक दे दिया। दरअसल वर्ष 1968 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जाॅन एफ कैनेडी के छाटे भाई राबर्ट कैनेडी डेमोक्रेटिक पार्टी की ही ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने का चुनावी अभियान चला रहे थे और इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी।उस प्रकरण का जिक्र हिलेरी ने क्यों किया? उनकी इस बेजुबानी से तो बड़े-बड़े सियासी जानकार भी हक्के-बक्के रह गए। यह बात अलग है कि खुद हिलेरी ने इस पर खेद जताने में जरा भी देर नहीं लगाई और सफाई दे डाली कि उनका इशारा बराक ओबामा की ओर कतई नहीं था। उनका कहना था कि उन्होंने बस एक संदर्भ के सिलसिले में राबर्ट कैनेडी की मिसाल दी थी। उध्र ओबामा का ध्ड़ा तो इस बात से हतप्रद तो हुआ, लेकिन हिलेरी के बैकपफुट पर चले जाने से उन्होंने इसे अपनी जीत ही मान लिया।इस प्रकरण से एक सवाल पैदा हुआ है कि क्या यह महज एक बेतुकी बयानबाजी थी या फिर अमेरिका की बदली सियासी फिजां का संकेत? कुछ इसे एक पूर्व राष्ट्रपति की बीबी की झल्लाहट के रूप में देखते हैं तो ऐसे लोगों की तादाद ज्यादा है जो अमेरकी राजनीति में आए विकार की इसे एक अहम मिसाल मानते हैं। कहा जा सकता है कि आने वाले समय में अमेरिका की राजनीति में ओछेपन की मात्रा और ज्यादा बढ़ने की संभावना है।

2 टिप्‍पणियां:

ऋतेश पाठक ने कहा…

ब्ळॉग की दुनिया में स्वागत है बन्धुवर....
बढिया पोस्टिंग है......
चिट्ठाजगत की चिप्पी लग तो शायद ज्यादा लोग पढ पायेंगे...
अच्छे ब्ळॉग के लिए फिर से बधाई....

Unknown ने कहा…

कहां हैं महाराज? ब्लॉग जोरदार है...बधाई!
-चन्दर