गुरुवार, 7 अगस्त 2008
बेचारे मुशर्रफ़
जब किसी की शक्ति छिनने लगती है तो उसका बौखलाना स्वाभाविक है। कुछ यही हाल पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ का भी है। वह प्रधानमंत्री गिलानी के समछ ख़ुद को कमजोर महसूस करने लगे हैं। धीरे धीरे पूरी दुनिया में गिलानी को ही पाकिस्तान के के प्रतिनिधि के रूप में देखा जा रहा है यानी मुशर्रफ़ थोड़े अलग थलग से दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में उनको अपनी मौजूदगी बताने का एक तरीका सूझा और वो हा भारत पर अनर्गल आरोप लगाने का। उन्होंने भारत पर आरोप लगाया की वह पाकिस्तान में आतंकवादियों को शास्त्र मुहैया करवा रहा है। इस आधारहीन आरोप पर तो बस इतना ही कहा जा सकता है की मुशर्रफ़ अपनी डूबती लुटिया को डूबने से बचाने और आईअसाई की करतूतों को छिपाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं।
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