कश्मीर में पिछले कुछ सालों में जो कुछ भी हो रहा है, उस सबके माध्यम से वहां लगातार भारत विरोध्ी अभियान चलाया जा रहा है। हाल में ही अमरनाथ श्राइन बोर्ड को जमीन दिए जाने से उपजे विवाद के बाद एक सवाल सभी के मन में उठना लाजमी था कि क्या वाकई कश्मीर भारत का हिस्सा है? इसी विषय पर पूर्व केंद्रीय मंत्राी और भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी से राजसरोकार संवाददाता प्रसिध नारायण शाही और अनवारूल हक की हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंश :
आज के हालात को देखते हुए, क्या ऐसा लगता है कि कश्मीर सचमुच भारत का हिस्सा है?
देखिए, इसके पीछे ऐतिहासिक कारण है। हमारे संस्थापक अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी की शहादत भी कश्मीर मुद्दे को लेकर ही हुई थी। वहां जो कुछ भी पहले हुआ, उसी का नतीजा है कि वहां अलगाववाद बढ़ता चला गया और हालत यहां तक आ गई है कि अपने देश का अभिन्न हिस्सा कहने के बावजूद इस तरह के सवाल पैदा हो रहे हैं।
श्राइन बोर्ड जमीन मामले को लेकर विवाद का खड़ा होना क्या दर्शाता है?
अमरनाथ श्राइन बोर्ड को जमीन दिए जाने पर मुझे नहीं लगता कि इतना बड़ा विवाद खड़ा होना चाहिए था। यह जमीन तो अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रधालुओं के लिए दी गई थी, वह भी केवल दो महीने के लिए। परंतु आश्चर्य है कि वहां के लोगों में इतनी सहनशीलता भी नहीं है कि जमीन दिए जाने को पचा सके। ऐसे में यह सवाल उठेगा ही कि आखिर यह देश कैसे चलेगा।
तो क्या वहां के निरंतर बिगड़ते हालात के लिए धरा 370 ही जिम्मेदार है?
कहीं न कहीं इस धरा 370 के कारण ही कश्मीर में अलगाव की स्थिति में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन चाहे कांग्रेस हो या पिफर कश्मीर के क्षेत्रीय दल, सभी इस पर सियासत करते रहे हैं। ये सभी लोग कश्मीर को देश से अलग-थलग करने का काम कर रहे हैं।
इसका मतलब कि धरा 370 जल्द से जल्द खत्म होनी चाहिए।
भाजपा का हमेशा यह मानना रहा है कि कश्मीर से धरा 370 हटनी चाहिए। हमने कहा है हम सत्ता में आएंगे तो धरा 370 को हटा देंगे।
लेकिन आपकी पार्टी की सरकार तो केंद्र में छह साल थी। पिफर आपने क्यों ऐसा नहीं किया?
दरअसल वह गठबंध्न की सरकार थी। उस सरकार के एजेंडा से यह मुद्दा ही बाहर था। इसलिए हम कुछ नहीं कर सके। जब हमें पूर्ण बहुमत मिलेगा, तब हम इस पर जरूर कदम उठाएंगे।
कश्मीर में अलगाववाद इस कदर है कि कुछ लोग वहां अलग मुद्रा की मांग करने लगे हैं। आप क्या कहेंगे?
यह बिल्कुल गलत है। अगर किसी भी तरपफ से देश के भीतर अलग मुद्रा चलाने की मांग उठती है तो वह देश को तोड़ने वाली बात है और भारतीय जनता पार्टी इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
कश्मीर में असैन्यीकरण की मांग पर आप का क्या कहना है?
आज पूरा कश्मीर आतंकवादियों के निशाने पर है। पाकिस्तान से लगातार आतंकी घुसपैठ भी हो रही है। आतंकवादियों का मुकाबला करने के लिए ही वहां सेना तैनात है। दूसरी बात यह भी है कि इस तरह की मांग सरकार और सेना देखेगी। इसको राजनीतिक ढंग से नहीं देखना चाहिए।
वहां देश तोड़ने वाले को हमारे सुरक्षा बल ही सुरक्षा देते हैं। क्या कहेंगे आप?
मैं सहमत नहीं हंू कि भारतीय सुरक्षा बल ऐसे लोगों को सुरक्षा देते हैं। अलगाववादियों के साथ वही रवैया अपनाना चाहिए जो देशद्रोहियों के साथ अपनाया जाता है।
कश्मीरी पंडित आज भी दर-बदर हैं। क्या वे कश्मीर वापस जा पाएंगे?
निश्चित तौर पर जाना चाहिए। यह बात सही है कि पिफलहाल उनके अनुकूल माहौल नहीं है। भाजपा की यह मांग पहले भी रही है और आज भी है कि कश्मीरी पंडितों के साथ न्याय होना चाहिए।
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