गुरुवार, 7 अगस्त 2008
क्या होगा?
हम मीडिया को अपने लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहते हैं, लेकिन यह स्तम्भ किस disha me जा रहा है? न्यूज़ channelon ही samacharo के लिए yamraj बन चुके हैं । कोई प्रसारित है की kayamat कब aane वाली है to कोई दूसरा dikhata है की चाँद पर हसीना है। क्या हम लोग इतने मूर्ख हो गए हैं की saphal होने के लिए इस had तक जा सकते हैं। अब वह वक्त आ गया है की जब मीडिया को ख़ुद स्तम्भ की aavshyakta होगी.
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